Poem On Maa


मेरी म
वो सुभा उठती है सारा काम करती है मााँ ,
फिर भी कहती है अभी तो बहोत सारा काम बाकी है ||
मर मर के सारा फिन काम करती है मााँ ,
फिर भी कही ज़बाने कहती है के करते क्या हो ||
वो मााँ का प्यार से मुसकुराना, वो प्यार से कहना, वो प्यारा से बात
करना,
ऐसा कोन करता है ज़माने मे पैसे के फबना ||
फनवाला मुह का िे कर कहती है भर गया पेहठ,
िु फनया मे ऐसा करता कोन है मााँ के फसवा ||
मााँ से प्यार करता हु बता भी नही पाता हू,
तू फकतना पागल और बेवकूफ़ है ऐ श ह ||
बड़ा बिनसीब है वो, मााँ है कहता है कुछ नही है पास,
जन्नत है तो पास अब और क्या चाफहए उसको ||बड़ा खुश नसीब है तू श ही, अगरचे बिनसीब,
जन्नत तो है अब और क्या चाफहए ||
ऐय श ह है तू फकतना फकस्मत का िहनी,
है मााँ तेरे पास अब और क्या चाफहये ||
करले फकस्मत पे नाज़ मााँ है तेरे पास,
मााँ से बिकर िौलत और क्या चाफहये ||
जा चुमले किम को कहिे प्यार करता हू मााँ ,
जो सुकून फमलेगा तुझको ऐसा सुकून के फसवा और क्या चाफहये ||
िौलत भी है इज्ज़त भी है श ह,
जो कमी खल रही है प्यार फक, वो फसिफ मााँ फक है ||
फकसी के फहस्से मे घर आया तो फकसी के फहस्से मे िु काअ आई,
मै घर मे सबसे छोटा था मेरे फहस्से मे मााँ आई ||
मेरी खुशी के खाफतर सब कुछ लूटा फिया,
िहनी तुझसे बडकर और कोन है मााँ ||मााँ फक िु आओ का फ़ैज़ फमला श ह तुझको भी,
खुशाहाल तुझको िे खकर बहोत मुसकुराती है मााँ ||


 

 || मैत्री ||

आयुष्यात अपमान, अपयश आणि पराभव

हेही गरजेचे आहे,

कारण यामुळेच पेटून उठतो तुमचा स्वाभिमान,

त्यातून जागी होते जिद्द..

आणि मग उभा राहतो तुमच्यातला खंबीर आणि अभेद्य माणूस..

येणारी प्रत्येक वादळे हि आपल्याला उध्वस्त करण्यासाठी नसतात,

तर आपण काय आहोत याची जाणीव करून देण्यासाठी असतात..!

फारस काही कळत नाही पण काहीतरी उमजत,

खूप भांडलोय सगड्यांशी, अनेकांशी तर नाती पण तुटलेलीत इतकं सगड असताना देखील

माझ्या साठी अहोरात्र झटलेल्या माझ्या सगळ्या मित्रांचे मनापासून आभार.

आयुष्यातील पुढील वाटचाली साठी जशे आज माझ्या पाठीशी होते अशेच नेहमी माझ्या सोबत राहा. 

 

आपलाच,

हर्षल तळेकर

 

Regards,

Harshal Talekar

CR-ME 8th sem